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  • KiritKumar Sanghvi   27 July 2018 8:50 PM

    आज गुरु पूर्णिमा है। गुरु के भी गुरु गौतम स्वामी है।

    गुरु उनके शिष्य को क्या देता है ? उनके पास जो ज्ञान है , वो ही दे सकता है। गौतम स्वामी ऐसे गुरु थे , जो उनके शिष्यों को केवलज्ञान देते थे। गौतम स्वामी को पहेले केवलज्ञान नही हुआ था , उनके शिष्यों को उनसे भी पहेले केवलज्ञान हुआ था।

    गौतम स्वामी में विनय गुण बहुत था। जब भी महावीर स्वामी भगवान समवसरण में देशना देते थे , तब गौतम स्वामी अपना मुंह नीचे रखते थे। ऐसा कहा जाता है की वो भगवान के पूछे बिना श्वास भी नही लेते थे। वो भगवान के पूछकर ही गोचरी वहोरने जाते थे। ये विनय गुण के कारण ही गौतम स्वामी को लब्धि मिली थी। वो लब्धि के भंडार कहे जाते है।

    गौतम स्वामीने द्वादशांगी की रचना की थी। 4 ज्ञान के धारक थे। उनको जो भी संचय होता तो वो ज्ञान का उपयोग करके संचय को दूर कर सकते थे , फिर भी उन्होंने समवसरण में महावीर स्वामी भगवान को 36000 हजार सवाल पूछे है , और भगवाने उनके सभी सवाल के जवाब दिये है। वो सभी सवाल जवाब भगवती सूत्र में है। वो सवाल गौतम स्वामी ए क्युं पूछे ? उनको तो सब पता था ? वो सवाल उन्होंने हमारे लिये पूछे है। भव्य जीवो पर उपकार करने के लिये , भगवान के मुख से समाधान पाकर भव्य जीवो सम्यक्त्व पामे , श्रद्धा की शुद्धि करे ऐसे भाव से उन्होंने 36000 सवाल भगवान को पूछे थे।

    गौतम स्वामी के रास में लिखा है की ,

    समवसरण मझार , जे जे संशय उपजे ए , 
    ते ते पर उपकार , कारणे पूछे मुनिपवरो।

    गोबर गाम में जन्मे , पृथ्वी माता और वसुभूति पिता के नंदन गौतम स्वामी को हमारा वंदन।


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