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  • Shalibhadra Mehta   09 March 2018 10:03 PM

    श्री ऋषभदेव के जन्म और ....दीक्षा कल्याणक पर

    आज से वर्षीतप की आराधना की शुरुआत करने वाले सभी श्रावक और श्राविकाओं का तप निर्विघ्न पूर्ण हो,
    ........भावभरी शुभकामनायें और अनुमोदना...

    श्री आदिनाथ भगवान की माता को प्रथम स्वप्न में वृषभ देखा था।
    श्री आदिनाथ भगवान का जन्म तीसरे आरे में हुआ था।
    श्री आदिनाथ भगवान का वर्ण कांचन, माता का वर्ण हरा और पिता का वर्ण पीला था।
    श्री आदिनाथ भगवान ने प्रारम्भिक शैशवकाल में अमृत पीया था।
    श्री आदिनाथ प्रभु का निर्वाण अष्टापद पर और तीसरे आरे में हुआ था।
    श्री ऋषभदेव का नाम शाश्वत है।
    श्री आदिनाथ प्रभु का चार मुष्टि लोच हुआ था।
    श्री आदिनाथ प्रभु ने पुरुषो की६४कलाएं और स्त्रीयों की७२कलाएं सिखाईं।
    श्री आदिनाथ भगवान कुमारवस्था में उत्तरकुरु कल्पवृक्ष के फल खाते थे।

    श्री आदिनाथ प्रभु को ४००दिन का प्रथम पारणा,गजपुर में कराने वाले राजा श्रेयांसकुमार सोमराजा का पुत्र और बाहुबली जी के पौत्र और भगवान के प्रपोत्र थे।
    श्री आदिनाथ भगवान द्वारा तीर्थ स्थापना पूर्व मरुदेवी माता मोक्ष में गई थी।

    जय जय श्री आदिनाथ
    ......कर्म खपावे आदिनाथ

    श्री सिद्धाचाल गिरि नमो नमः
    श्री विमलचल गिरी नमो नमः
    श्री शत्रुंजय गिरी नमो नमः
    .....वंदन हो गिरिराज ने....


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