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  • अमृतलाल जैन    29 October 2017 9:35 AM

    जिन-गुरु अमृत-वाणी, चैन्नई ने पूरे किये दस हजार से ज्यादा जिन-ज्ञान के लेख पिछले 77 महीनों में...

    जैन एकता का परिचय, विश्व का एक मात्र पसंदीदा प्लेटफॉर्म जहां... लगभग सभी जैन समुदायों की वितरागमयी  "गुरूवाणी" का समावेश करने की ओर पर्यासरत ... देश के 900 से ज्यादा गांव, शहर, विश्व के कई देशों में भी, इंटरनेट के विभिन्न माध्यमों - व्हाट्सएप्प, गूगल, फेसबुक, जैन एप्स् आदि माध्यमों से  "जिन-गुरु : अमृत-वाणी" के लेख प्रसारित होते है । 2001 में 100 SMS से शुरू हुई जैन स्वाध्याय का प्रसारण, 2012 में 10 हजार, 2014 में 2 लाख और इस वर्ष करीब 3 लाख से ज्यादा धर्मानुरागियों  ( श्वेताम्बर, दिगम्बर, तपागच्छ, तेरापंथी, खरतर गच्छ, स्थानक वासी आदि ) तक पहुँच रहा है। यह सफर आप सभी कल्याणमित्रों की प्रेरणा, विश्वास और जिनशासन के प्रति श्रद्धा से ही हम आगे बढ़ते चले जा रहे है। हमारा उद्धेश्य है - घर घर पहुंचे - जिन-गुरू : अमृत-वाणी । "जैन एकता" समय की सबसे बड़ी एवं प्रथम जरूरत है।  जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी भर्मित न हो।

    हमारे द्वारा प्रेषित लेख / मैसेजेज का विवरण....

     

    हमारे द्वारा प्रेषित लेख / मैसेजेज का विवरण....

    1. संक्षिप्त "जिन-गुरु : अमृत-वाणी" एवं रोजाना त्याग के क़रीबन 1900 लेख.
    2. जय जिनेन्द्र ! सुप्रभात् ! सुविचारम् !! के 100 लेख.
    3. जैन कविताएँ - 100
    4. संगीत से मुक्ति की ओर... ऑडियों गीत -100
    5. भगवान् महावीर प्रभु की अंतिम देशना - 75+50
    6. Lord Mahavira - External Quotes -50
    7. दादागुरु श्रीमद् राजेन्द्र सूरीश्वरजी के अंतिम प्रवचन -50, एवं दादागुरुदेव की जीवनी के लेख
    8. प्रवचन : आचार्य श्री जयंतसेन सूरीश्वरजी म° सा° -100+75+90
    9. प्रवचन : आचार्य श्री अजितशेखर सूरीश्वरजी म° सा° -100
    10. MTG प्रश्नोंत्तर : आचार्य श्री महाश्रमणजी म° सा° -100
    11. "जयणा ए धम्मो -दया के पथ पर" आचार्य श्रीमद् जयानंद सूरीश्वरजी म° सा° - 40 एवं 2017 चातुर्मास के 45 प्रवचन
    12. आओ "जिन-गुरु : अमृत-वाणी" का अमृत पान करें -150
    13. Jitendra Jain IJF column -150
    14. "Jain Siddhant series" from Parul Patwa, Hong kong -50
    15. Jainism Course "Divine Jain Foundation -50
    16. 18 पाप स्थानक अर्थ सहित सीरीज -20
    17. आनन्द सुमन की कथाएँ -50
    18. श्रावक संबोध - आचार्य तुलसी की कृति -55
    19. योगसार अमृत गाथा - 55
    20. २० वीं शताब्दी के सुश्रावक श्री शांतिलालजी पद्माजी बागरानगर का श्रावक जीवन के लेख
    21. मेरा जैन समाज बनें - धर्मानुरागी, प्रगतिशील, महान् के 20 लेख
    22. पुरे वर्ष भर में आने वाले सभी त्योहारों का जिन-सिद्धान्त के अनुरूप विश्लेषण, जानकारी...
    23. नवपद ओली, चातुर्मास, पर्युषण, दस लक्षण पर्व, दशहरा, दीपावली, ज्ञानपंचमी,  चैत्र पूर्णिमा, नव्वाणु, कार्तिक पूर्णिमा, शत्रुंजयतीर्थ, गिरनारजी, सम्मेतशिखरजी आदि अन्य तीर्थो का इतिहास, महिमा वर्णन और भी कई विषयों पर लेख इतिहास के पन्नों से...

     


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