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  • प्रीति शाह    03 October 2017 9:05 AM

    1000 शुद्ध आयंबिल का तप..

    साध्वी गंभीर रेखा श्रीजी की 100 वीं ओली तप पूरा हुआ। पहला मौका है जब किसी साध्वी ने इतनी कठिन तपस्या की।20 साल की दीक्षा में 15 साल जितने आयंबिल किए- साध्वीश्री गंभीर रेखा ने 20 साल के दीक्षा पयार्य में 14 साल जितने आयंबिल तप किए हैं। उसमें 1000 शुद्ध आयंबिल का तप किया। शुद्ध आयंबिल अर्थात पानी के अंदर चावल भिगोकर के वापरना। 100वीं आयंबिल की ओली का आरंभ हुआ। 
    तप से बढ़ता है निखार
    अनुयोगाचार्य वीरविजय ने कहा तप जीवन का स्वर्णिम आयाम है। इससे आत्मा का निखार बढ़ता है। उत्कृष्ट तप से जीवन भवसुद्ध के किनारे तक पहुंचता है। आयंबिल का तप रस की लालसा मिटाने वाला है।तप से कर्मों की निर्जरा होती है...तराजू के बिना माल तुलेगा नहीं, चाबी के बिना ताला खुलेगा नहीं वैसे तप के बिना पाप धुलेगा नहीं। यह बात हम सभी को समझ लेना चाहिए। जो टेंपररी होता है वह तप तथा परमानेंट होता वह त्याग है। तप के साथ कषायों का त्याग होना चाहिए। 


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