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  • प्रीति शाह    12 August 2017 7:47 PM

    जैन ध्वज में ५ रंग क्यों होते हैं ?

    जैन ध्वज पंच परमेष्ठी का सूचक है । नवकार में पांच पदों के
    वर्ण ( रंग ) कहे जाते हैं -

    १. अरिहंत परमात्मा का वर्ण सफ़ेद ( श्वेत ) है । सफ़ेद रंग
    अपार करुणा , परम शांतिमय शुक्लध्यान और आत्मा की
    पवित्रता होने का प्रतीक है।

    २. सिद्ध परमात्मा का वर्ण लाल है । रक्त ( लाल ) वर्ण
    आत्मीय ऊर्जा , पूर्णता और करुणा का सूचक है ।

    ३. आचार्य भगवन्तो का वर्ण पीला है । यह जिनशासन के
    पीत मुकुटबद्ध राजा के समान पीला है एवं सूर्य जैसी
    तेजस्विता और अनुशासन का प्रतीक है ।

    ४. उपाध्याय भगवंत का वर्ण हरा है । पाठक / अध्यापक होने
    के हरा रंग उनके ज्ञान को , उनके दायित्व के संतुलन की
    प्राकृतिक ऊर्जा को प्रकट करता है।

    ५. साधु भगवन्तो का वर्ण काला है । प्रायः उनके
    शारीरिक , मानसिक मेहनत के कारण गहरे रंग की चमड़ी के
    कारण और राग द्वेष आदि भावुकता से दूर होने के कारण उनके
    पद का वर्ण काला है ।
    जैन धर्म के झंडे में , कई रक्षा पोटली में , महापुजनों में पांच
    परमेष्ठियों के ये ५ वर्ण ही होते हैं जो जिनशासन के आधार
    पांच परमेष्ठी पदों को सूचित करते हैं ।

     
     


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