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  • Priti Shah   12 June 2017 8:29 PM

    कही ये हमारा ४८ वा भव तो नहीं ?

    मनुष्य जन्म मिलना ये अति दुर्लभ कुय है? अति दुर्लभ मनुष्य जन्म मिलने के बाद क्या करना चाहिए?

    कोई भी जीव सिर्फ २००० सगरोपम वर्ष के लिए निगोद से बाहर निकलते है।
    उसमे भी उस समय दरम्यान ज्यादा से ज्यादा ४८ भाव ही मनुष्य की प्राप्ति होती है।
    उसमे जो अकर्मभूमि में मनुष्य तरीके उत्पन्न हुए तो वहाँ कोई धर्म होता नहीँ।
    इसिलए उसमे जितने भी मनुष्य के भव मील हो तो भी आध्यात्मिक दृष्टि से (waste) गये।
    कर्मभूमि में भी ६ के ६ आरे मे कुछ ही ऐसा समय है जिसमे धर्मकरणी है।
    बाकी के कितने समय ऐसे होंगे जिसमे मनुष्यभव मिले होंगे फिर भी आध्यात्मिक दृष्टि से निष्फल गए
    अब समझलो के कर्मभूमि भी है और समय पर धर्मकरणी का है.....परंतु अपना जीव धर्म पा सके ऐसी परिसिथति मिली के नहीं?? जन्म तेज मृत्यु तो नही हुवा? गर्भ मे मृत्यु हुवा? समुर्छिम मनुष्य जैसे जन्म मरे?अपर्याप्ता मरे? ऐसे कुल या जाति मील जहाँ केवली भगवंतों का धर्म ज ना मिले? ....किसे खबर है के क्या हुवा?
    ४८ भव में से कितने ऐसे भव चले गए और कितने बाकी है इसकी भी किसीको खबर नही....
    अब तो समझ लो के आ भाव में धर्म करने योग्य सभी संजोगो समझ प्राप्त हुई है।
    अब बोलो ये मनुष्य जन्म कितना अनमोल है?
    ऐसे अनमोल मनुष्य जन्म को पाकर दूसरे हजारों काम छोड़ कर आत्मा को जानो...
    कोई अगर ऐसा कहे के आत्महित के लिए समय नही तो समझ लेना के उसे उनकी आत्मा से प्रेम नहीं और उसे आत्मा की चिन्ता, फिक्र नही 
    जो जीव खाना, पीना,कमाना आदि कार्यो में पुरुषार्थ करते है और धर्म के बातों को भावी,होनहार,नसीब ये सब कहकर पुरुषार्थ करते नही....
    वे लोग अति दुर्लभ मानव जन्म की कीमत को समझते नही।


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